छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 NEP प्रभारी - श्री सनत कुमार देवांगन (सहायक प्राध्यापक हिंदी)
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 क्यों?
■ राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का भाव लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, विषय संबंधी ज्ञान के साथ कौशल विकास, मूल्यपरक तथा रोजगारोन्मुखी शिक्षा की ओर उन्मुख करती है।
■ इस नीति में सतत मूल्यांकन का प्रावधान है, जिससे विद्यार्थियों के मानसिक ऊर्जा के साथ बौद्धिक क्षमता में भी वृद्धि होगी।
■ सेमेस्टर आधारित पाठ्यक्रम होने के कारण विद्यार्थियों को परीक्षा का तनाव नहीं होगा।
■ बहु-विषयक प्रणाली पर आधारित यह नीति विद्यार्थियों को उनकी इच्छानुसार दूसरे संकाय के विषयों का अध्ययन करने की स्वतंत्रता देती है।
■ पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान पद्धति के समावेश के साथ पाठ्योत्तर गतिविधियों को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है।
■ प्रौद्योगिकी के अनुकूलतम उपयोग पर बल दिया गया है।
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के मुख्य प्रावधान
■ 03/04 वर्षीय बहु-संकायी स्नातक पाठ्यक्रम।
■ समस्त पाठ्यक्रम क्रेडिट पर आधारित होने के साथ ही चॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम के अंतर्गत होंगे।
■ 03/04 वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम को विद्यार्थी अधिकतम 07 वर्षों में पूर्ण कर सकता है।
■ पाठ्यक्रम अवधि में विद्यार्थी “बहु-प्रवेश बहु-निकास” प्रावधान के अंतर्गत प्रथम वर्ष पूर्ण कर किसी कारणवश पढ़ाई छोड़ देता है तो उसे उसी संकाय के अंतर्गत “सर्टिफिकेट”, दो वर्ष पूर्ण करने पर “डिप्लोमा” की उपाधि दी जाएगी एवं तृतीय वर्ष पूर्ण करने पर “स्नातक” की उपाधि प्राप्त कर पाठ्यक्रम को छोड़ सकता है।
■ जिन विद्यार्थियों को विषय विशेष में विशेषज्ञता प्राप्त करने या शोध करने की इच्छा हो, वे पाठ्यक्रम को निरंतर चौथे वर्ष में जारी रख सकते हैं एवं “ऑनर्स/ऑनर्स विद रिसर्च” की उपाधि चौथे वर्ष में प्राप्त कर सकते हैं।
■ इस नीति के अंतर्गत बहु-विषयक शिक्षा, वैचारिक समझ एवं आलोचनात्मक सोच, नैतिक मूल्यों के साथ कौशल विकास को भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है।
■ सतत आंतरिक मूल्यांकन में 30% अंक एवं अंत सेमेस्टर परीक्षा में 70% अंकों का प्रावधान रखा गया है। विद्यार्थी को उत्तीर्ण होने हेतु इन दोनों को मिलाकर (आंतरिक एवं अंत सेमेस्टर परीक्षा) कुल 40% प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
■ जेनेरिक इलेक्टिव के अंतर्गत कला/विज्ञान/वाणिज्य संकाय का विद्यार्थी अपने संकाय के अतिरिक्त अन्य संकाय के किसी एक विषय को अपनी इच्छानुसार ले सकता है।
■ विद्यार्थी शिक्षा के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तथा SWAYAM/MOOC में उपलब्ध पाठ्यक्रमों में से भी विषय से संबंधित पाठ्यक्रम की पढ़ाई कर सकता है।
■ स्वाध्यायी छात्रों का समयबद्ध नामांकन एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने पर बल दिया गया है।
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शिक्षा नीति 1986 |
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 |
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03 वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम |
03/04 वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम |
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वार्षिक प्रणाली |
सेम्सेस्टर प्रणाली |
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क्रेडिट आधारित पाठ्यक्रम नहीं था |
क्रेडिट आधारित पाठ्यक्रम एवं अन्य संकाय के विषय चुनने की स्वतंत्रता |
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आतंरिक मूल्यांकन की व्यवस्था नहीं थी |
आतंरिक मूल्यांकन में 30% एवं अंत सेमेस्टर में 70% अंको का प्रावधान |
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ओनर्स पाठ्यक्रम नहीं था |
आनर्स /आनर्स विषय विथ रिसर्च पाठ्यक्रम चौथे वर्ष के विद्यार्थियों के लिए होगा
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इन्तेर्प्रेनेर्शिप एवं एंट्रेप्रेनुर्शिप की व्यवस्था नहीं थी |
इन्तेर्प्रेनेर्शिप एवं एंट्रेप्रेनुर्शिप को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है |
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स्नातक पाठ्यक्रम के मध्य में पढाई छोड़ने पर कोई उपाधि नहीं मिलती थी |
प्रथम वर्ष / द्वितीय वर्ष के पश्चात पढाई छोड़ने पर क्रमशः सर्टिफिकेट /डिप्लोमा की उपाधि प्राप्त होगी |
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लाभ
■ विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास।
■ मूल्यपरक, कौशल विकास, क्षमता संवर्धन के साथ जेनेरिक इलेक्टिव विषय के अध्ययन से स्वरोजगार के अवसर में वृद्धि।
■ विद्यार्थियों में आलोचनात्मक सोच, डिजिटल साक्षरता के साथ रोजगार क्षमता एवं शारीरिक विकास को बढ़ावा देते हुए भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करता है।
■ पूरे प्रदेश में समरूप शिक्षा होने से वनांचल एवं दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को शिक्षा की मुख्यधारा में जोड़ना।